Sunday 5 March 2017

508----आज का गीता जीवन पथ

आज का गीता जीवन पथ
दश अध्याय 
जय श्री कृष्णा.
सबका भला हो !
(समर्पित है देश के सब खिलाड़ियों के नाम ;गर्मी, सर्दी या बरसात ;उनकी महनत परिश्रम के प्रतिफल हमें सम्मान मिलता है हम,जिनकी सेवाओ से प्रेरित गौरवान्वित होते हैं)


नागों में मैं शेषनाग ,
जल चर अधिपति वरूण देव
पितरों में मैं अर्यमा पितर
जहां में हूं यमदेव
10/43
दैत्यों में पहलाद हूं मैं
गणना करते समय जान
पशुओं में मृगराज
पक्षियों में तू गरूड़ मान
10/44
पवित्र मैं करता वायु रूप
शस्त्रधारी मैं श्रीराम अगर
नदियों मैं गंगाजी हूं मैं
जल में रूप मेरा मगर
10/45
आदि अन्त और मध्य रूप (सृष्टिका )
ज्ञान में बृह्म विद्या
वाद भी जो आपस में होते
 तत्व निर्णय मैं सविद्या
10/46
अकार समाया मुझमें
 मैं हूं द्वन्द समास
काल का भी महाकाल
 बंधती मुझसे सबकी आस
10/47
विराट स्वरूप है मेरा
पालन पोषण सब का करता
मुझे समझने की कोशिश
हर कोई मन से करता
10/48
संहार कभी मैं हूं , पार्थ
कभी उत्पत्ति का कारण मुझसे
स्त्री पुरुष विभूति मुझसे
समझ सके: तू समझ ले मुझसे
10/49

शेष कल

मेरी विनती
कृपा तेरी काफी है ,प्रत्यक्ष प्रमाण मैं देता
जब-2 विपदा ने घेरा ,गिर ने कभी ना तू देता
साथ मेरे जो पाठ है करते ,कृपा बरसते रखना तू
हर विपदा से उन्है बचाना ,बस ध्यान में रखना कृष्ना तू
निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I
कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II
(अर्चना राज)
नोट- जो लोग जातिवाद कहते हैं,उनके लिए जरूरी है कि वे कृष्णा धारा से जुड़े I
कृष्णा ने मानव कल्याण की ही बात की हैं जातिवाद खुद खुद समाप्त हो जायेगा





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