Monday, 2 November 2015

0000274---Poem-----Yes! I can do,/K/012/00564


(Sometimes,People give the piece of advice undemanding and unasked for and it disturbs us to the extent,I feel it as an obstacle !)
Yes! I  can do,
I can do,
Don’t come in my Way,
Let me Show,
I can do, Yes I can do !
Let problems come,
Be tested by some,
More so I may suffer,
But I won’t be a duffer,
I ‘ll overcome one day,
Don’t come in my way,
Let me Show,
I can do, Yes I can do !---001
I am poor one,
Who need none,
But peace & prosperity,
Away from all pity,
Now leave my way,
Don’t come in my way,
Let me Show,
I can do, Yes I can do !---002
I am fed up,
So much tied up,
Advice retard me,
To tread the way you see,
You want me follow,
Whether good or shallow,
I want something new,
To change your age-old view,
Now let me say,
Don’t come in my way,
Let me Show,
I can do, Yes I can do !---003
(Archna & Raj)

Saturday, 31 October 2015

Srajan (E-Magazine): 0000-273-आज का गीता पाठ

Srajan (E-Magazine): 0000-273-आज का गीता पाठ: अर्जुन, क्षत्रिय हो तुम!, भाग युद्ध से न जाओ', धिक्कारेगी दुनिया सारी , माँ का दूध नहीं लजाओं.I117I धर्मयुद्ध छिड़ा ...

0000-273-आज का गीता पाठ

अर्जुन, क्षत्रिय हो तुम!,
भाग युद्ध से न जाओ',
धिक्कारेगी दुनिया सारी ,
माँ का दूध नहीं लजाओं.I117I

धर्मयुद्ध छिड़ा है अब,
भाग्यवान बने हो तु म,
सौभाग्य मिला है तुमको ,
भय से कहाँ जाते हो तु मI118I

धर्मयुद्ध से मुँह मोड़ना ,
कीर्ति साथ नहीं देगी ,
स्वर्ग का द्वार दूर रहेगा ,
अपकीर्ति सदा तुम्हें मिलेगी I119I

सदियों तक अपकीर्ति का भागी,
शर्मनाक है बात यहाँ ,
इससे बेहतर मर जाना,
अप कथन कहेगा सारा जहाँ I1120I

सम्मान मिला लोगों से ,
लघुता तेरा हरण करेगी ,
भय के कारन अर्जुन !,
अपकीर्ति तेरा वरण करेगी I121I

क्षमता हीन, डरपोक,बुरा ,
अपयश शब्द नहीं रूकेगें ,
इससे बड़ा दुःख क्या ?,
लोगों की नजर में हम गिरेगें I122I

मृत्यु वरण कर लेगी,
स्वर्ग में तेरा स्वागत है ,
जीत मिली संग्राम में ,
धरा पे लेा तेरा स्वागत है I123I

लाभ ,हानि ,जीवन ,मरण ,
यश, अपयश समान समझ ,
सुख- दुख ,जय -पराजय ,
असमान नहीं इन्हें समझI124I

कृष्ण ने कहा अर्जुन से !,
त्यागो भय ,देर ना कर,
महान योद्धा इस धरा का तू ,
तैयार रहो युद्ध करI125I

 “आज का कर्म भाग्य है कल “

ज्ञान मिला है तुमको ,
जा कर्म में परिवर्तित कर,
 त्याग स्भी बन्धन अब,
तैयार रहो युद्ध कर  I126I
 बुद्धि हीन है पुरुष वे,
 मीठी वाणी से कहते ,
वे क्या रक्षा कर पायगे ,
भोग विलास में डूबे रहते I127I
 अहंकार का प्रर्दशन ,
ऐश्वर्य ,कामना ,कमजोरी ,
बुद्धिहीन वे कर्महीन ,
जीवन जैसे किताब है कोरी I128I
अप्राप्ति का प्राप्ति योग ,
प्राप्ति की रक्षा क्षेम कहें
,आसक्ति-हीन ,द्वन्दरहित ,
वेदों की वाणी यही कहें I129I
योग बने  साध्य तेरा ,
साधन इसके  क्षमा योग्य!
कर्तव्य निभा ,प्रभुता पा ,
उत्तम ,सर्वोत्तम ,योग धारण:योग्य! I130I
वर्षा होती, जल भरता! ,
पोखर जा सागर से मिले,
बनता ज्ञान का सागर विशाल ,
अथाह ज्ञान की लहर चले I131I
 तेरा नाता कर्म से है,
फल का मिलना भी तय् हैं,
 जैंसा तेरा कर्म रहेगा ,
अनुरूप उसी के मिलना भी तय् हैं: I132I
 फ़ल्  की इच्छा नहीं करो,
 फ़ल् की पहुँच हाथ से दूर,
आज का कर्म भाग्य है कल ,
मिलता सदा ना जाता दूर I133I
 कर्म करें, सोचें जीत ,
जीत हार का वियोग यहाँ ,
हार सोचते जीत मिले,
हार का हार संयोग यहाँI134I


 अर्जुन, उठों धनुष को तान ,
धर्मयुद्ध का रख तू मान ,
 अधर्म का अंश मिटेगा,
 हिम्मत कर ,तू इसको जान I135I
कंरु ना कंरू के फेरे में ,
उलझ ना तू गिर जायेगा ,
निर्णय तेरा मुशिकल होगा,
 अधर्म धरा  पे रह जायेगा I136I


सोचो ! देखो! युद्ध यहाँ,
मान सम्मान जिन्होंने पाया,
कुछ तो अधर्म जो मिले,
अंधेरा तन मन पे छायाI137I

सम बुद्धि युक्त पुरूष बनो ,
पाप पुन्य को अब, त्यागो ,अर्जुन !,
समत्व स्वरूप है कर्मकुशलता,
 कर्म बन्धन से जागो ,अर्जुन !I138I

समबुद्धि वाले पुरूष यहां,
बड़े वें भी ज्ञानी है ,
फ्लेच्छा -विहीन हैं. वे ,
पर हम सब अज्ञानी हैं I139I

जिस दिन दलदल मोह रूप ,
अर्जुन !तुमने पार किया ,
लोक परलोक के भोगों से ,
समझो अपना उद्धार कियाI140I

वैराग्य मिलेगा, तुम को अर्जुन !,
निर्विकार परम पद को पाओगे ,
जीवन का मर्म मुठ्ठी में ,
तारण स्वयं को कर जाओगेI141I

शेष कल

 

निपट निरक्षर अज्ञानी है हम ,किससे, क्या लेना, क्या देना I

कृपा बनाये रखना, कृष्णा, शरणागत बस अपनी लेना II


(अर्चना व राज)

 


Friday, 30 October 2015

Srajan (E-Magazine): 0000272----हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे लड़...

Srajan (E-Magazine): 0000272----हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे लड़...: (राज) हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे लड़ना मेरा है अधिकार ! (Hindi Poem-J51/0000552) सुबह से मैं बन ठन के ब...

0000272----हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे लड़ना मेरा है अधिकार ! (Hindi Poem-J51/0000552)



(राज)
हां ! भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे ,
लड़ना मेरा है अधिकार !
(Hindi Poem-J51/0000552)
सुबह से मैं बन ठन के बैठी ,
करती तेरा इन्तजार ,
आज का दिन बड़ा निराला ,
सौंप दिया मैनें तुम को यार,
हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे,
लड़ना मेरा है अधिकार I1I
 

दिल से दुआ यही करूंगी,
मेरी अर्चना, मेरी प्रार्थना ,
कष्ट अनूठे ,दुख derdo को ,
सह लूंगी मैं कर के बहाना,
मेरी पूजा यही कहेगी,
दिल से मेरी ना तकरार,
हां भूल ना जाना ब्रेक हाथ में मेरे,
लड़ना मेरा है अधिकार I2I
लिस्ट सभालों ,भूल न जाना,
जो लिक्खा वो लेके आना ,
पति मेरे परमेश्वर तुम हो ,
कुछ भी देखो,भूल न आना ,
भूल गये तो याद भी रखना ,
लड़ने को मैं हूँ तैयार,
हां भूल ना जाना ब्रेक हाथ में मेरे ,
लड़ना मेरा है अधिकार I3I
कभी-कभी लगता होगा,
तकलीफें मिलती हमसे ,
बार- बार कहने से लगता ,
क्यों लड़ती हरदम तुम से,
अपने ही अपनों से लड़ते,
बाकी करते बात बेकार,
हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे ,
लड़ना मेरा है अधिकार I4I
यही जिन्दगी प्रेम सिखाती,
बुनियाद करें हम मजबूत,
मेरा लड़ना याद दिलाता ,
प्रेम का सबसे बड़ा सबूत ,
आज मिठाई भूल न जाना ,
नहीं मिलेगी कोई फटकार,
हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे,
लड़ना मेरा है अधिकार I5I
भारत की नारी हूं मैं,
धर्म सनातन मैं निभाती,
कभी मैं छठ का व्रत रखती,
करवाचौथ तेरी याद दिलाती,
भला हो सब परिवार देश का ,
हम मनाते सब त्यौहार,
हां भूल ना जाना ब्रे क हाथ में मेरे,
लड़ना मेरा है अधिकारI6I

अर्चना


( अर्चना & राज)

0000271---English Poem (J/039/0000542)Fly away there,--

English Poem
(J/039/0000542)
Let me say,
Let me feel,
I want to fly,
Fly away there,----------
Where everything is;
Sweet,sonorous and sound,
Here for all deal,
Good or weal,
Have nothing to see
,Have nothing to me,
All what I saw,
At sufferance here,
Is left behind
To me nothing is dear,
Nothing is my(mine),
Even if I cry,
So I want to fly,
Fly away--------
Peace and prosperity,
All that I pity,
Happiness even at best,
All left is worst or rust,
Whom to say ,
Whom to share,
Hard,yea,it is nay,
I don't dare,
Only I can cry,
So I want to fly,
fly away -------!

Thursday, 29 October 2015

Srajan (E-Magazine): 0000270------The Expectations in Between

Srajan (E-Magazine): 0000270------The Expectations in Between:       The change in the power at the center and subsequent win in different states ,even in the local levels clearly confirm that the peopl...